Mining Scandal : कुसमी थाना क्षेत्र में हत्या का मामला…! SDM सहित चार गिरफ्तार

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Mining Scandal

कुसमी/बलरामपुर, 16 फरवरी। Mining Scandal : बलरामपुर जिले के कुसमी थाना क्षेत्र में एक ग्रामीण की मौत के मामले में पुलिस ने एसडीएम करुण कुमार डहरिया और तीन अन्य लोगों को गिरफ्तार किया है। ये घटना अवैध बॉक्साइट उत्खनन की सूचना पर हुई, जब प्रशासनिक टीम ने ग्रामीणों पर लाठी-डंडों से हमला किया, जिसके बाद एक बुजुर्ग की मौत हो गई। पुलिस ने हत्या सहित विभिन्न धाराओं के तहत आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया है।

कुसमी में एक ग्रामीण की हत्या

यह घटना ग्राम पंचायत हंसपुर में अवैध खनन की सूचना के बाद घटी। टीम में एसडीएम करुण डहरिया, नायब तहसीलदार पारस शर्मा और अन्य लोग शामिल थे। सूचना के आधार पर टीम रात 8 बजे राम नरेश राम (60 साल), अजीत उरांव और आकाश अगरिया से पूछताछ करने पहुंची। तीनों ग्रामीण खेत से घर लौट रहे थे, तभी टीम ने उन्हें रोककर अवैध खनन के शक में बुरी तरह पीटा। इस दौरान एसडीएम और नायब तहसीलदार के साथ कुछ प्राइवेट लोग भी थे।

ग्रामीणों पर लोहे की रॉड, डंडे और लात-घूंसों से जमकर हमला किया गया। हमले में राम नरेश राम की गंभीर हालत हो गई और इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई, जबकि अन्य दो घायल अजीत उरांव और आकाश अगरिया अस्पताल में भर्ती हैं।

पुलिस टीम की पिटाई से ग्रामीण की मौत

पुलिस ने घटना के बाद एसडीएम करुण कुमार डहरिया सहित अन्य आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। आरोपियों में विक्की सिंह उर्फ अजय प्रताप सिंह, मंजीत कुमार यादव और सुदीप यादव शामिल हैं। इन्हें धारा 103(1), 115(2) और 3(एस) के तहत गिरफ्तार किया गया है। सभी आरोपियों को न्यायिक रिमांड पर भेजा गया है। पुलिस मामले की जांच जारी रखे हुए है, और पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान के आधार पर कार्रवाई की जाएगी।

क्षेत्र में तनाव

घटना के बाद कुसमी में तनाव फैल गया, और स्थानीय ग्रामीणों और समाज के लोगों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। उन्होंने मांग की कि एसडीएम और अन्य आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा दिया जाए। प्रशासन ने मृतक के परिवार को तत्काल एक लाख रुपये की सहायता राशि प्रदान की है।

इसके अलावा, अतिरिक्त पुलिस बल को तैनात कर कुसमी क्षेत्र को छावनी में तब्दील कर दिया गया है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो। यह घटना न केवल प्रशासन की ओर से अवैध उत्खनन पर कार्रवाई को लेकर सवाल उठाती है, बल्कि प्रशासनिक अधिकारियों की भूमिका और उनके कार्यों पर भी गंभीर सवाल खड़े करती है। इस घटना के बाद क्षेत्र में तनाव और विरोध बढ़ने के कारण प्रशासन को कड़ी सुरक्षा व्यवस्था करनी पड़ी है।

 

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