Korba Breaking: लो लाइन एरिया के नाम पर बंद पॉवर प्लांट बना राखड़ डैम, अधीक्षण अभियंता ने खेला बड़ा खेल

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कोरबा। सीएसईबी के बंद पड़े केटीपीएस पॉवर प्लांट को लो लाइन एरिया बताकर अघोषित रूप से राखड़ डैम में तब्दील कर दिया गया है। नियमों की आड़ में चल रहे इस खेल में किशन कन्हैया के नाम से चर्चित अधीक्षण अभियंता की भूमिका सवालों के घेरे में है। हालात ऐसे हैं कि सीएसईबी के बड़े अफसर भी इस मामले में खुलकर जवाब देने की स्थिति में नहीं दिख रहे।

बताया जा रहा है कि कभी अनुपयोगी मानी जाने वाली राख अब “सफेद सोना” बन चुकी है और सीएसईबी के कुछ अफसरों के लिए कमाई का बड़ा जरिया बन गई है। सूत्रों के मुताबिक डीएसपीएम के अधीक्षण अभियंता किशन कन्हैया ने नियम-कायदों को अपने हिसाब से मोड़ते हुए बंद पड़े पॉवर प्लांट की जमीन को ही राख फिलिंग के लिए इस्तेमाल करना शुरू कर दिया।

एनपीजे की टीम जब प्लांट की पड़ताल करने पहुंची, तो चौंकाने वाला नजारा सामने आया। पॉवर प्लांट परिसर की जमीन पर लगभग 5 लाख टन राख डंप की जा चुकी है। सवाल यह उठ रहा है कि बंद पॉवर प्लांट को राखड़ डैम में बदलने की अनुमति किस स्तर से दी गई और क्या इसके लिए पर्यावरणीय व तकनीकी स्वीकृति ली गई थी।मामले ने तूल पकड़ लिया है और अब जिम्मेदार अफसरों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।

लो-लाइन एरिया के नाम पर पर्यावरण ने दिया है अनुमति

 

कोरबा पूर्व स्थित बंद पड़े केटीपीएस पावर प्लांट में राख भराव को लेकर अहम दस्तावेज सामने आए हैं। आरटीआई के तहत प्राप्त पत्र के अनुसार माइनस लेवल भूमि को लो-लाइन एरिया बताते हुए फ्लाई ऐश भराव की अनुमति दी गई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अलग-अलग पत्रों के माध्यम से कुल लाखों मीट्रिक टन फ्लाई ऐश भराव की स्वीकृति दी गई। यह अनुमति पर्यावरण मंत्रालय की अधिसूचना और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की गाइडलाइन के तहत दी गई बताई जा रही है।अनुमति में शर्त है कि राख भराव केवल निर्धारित खसरा नंबर में ही किया जाएगा और इसकी वैधता 30 दिनों तक सीमित रहेगी। बावजूद इसके बंद पावर प्लांट में बड़े पैमाने पर राख डंपिंग को लेकर अब सवाल उठने लगे हैं। दस्तावेज सामने आने के बाद जिम्मेदार अफसरों की भूमिका और वास्तविक स्थिति पर जांच की मांग तेज हो गई है।

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