
कोरबा। सुशासन की सरकार में नगर निगम कोरबा में टेंडर मैनेज का खेल एक बार फिर उजागर हुआ है। आरोप है कि निगम के भीतर एक तरह का “ग्रीन कॉरिडोर” बना दिया गया है, जिसके जरिए बिना निविदा प्रक्रिया पूरी हुए ही काम दिलाने का भरोसा देकर ठेकेदारों से मोटी रकम वसूली जा रही है।
ताजा मामला शहर की सड़कों पर विद्युत खंभों में लगाई जा रही LED रोप लाइट का है। निगम की निविदा के अनुसार इस कार्य के लिए टेंडर खोलने की अंतिम तिथि 30 जनवरी 2026 तय है, लेकिन इससे पहले ही शहर की आधे से अधिक सड़कों पर रोप लाइटें लग चुकी हैं और कई जगह चालू हालत में भी नजर आ रही हैं। शिकायत सामने आने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और एक वरिष्ठ IAS अधिकारी ने निगम के एक “मैनेजर टाइप” अफसर को तलब कर जवाब मांगा है।
सरकार बदली, सिस्टम नहीं
नगर निगम में शहर की सरकार बदली है, लिहाजा यह उम्मीद थी कि टेंडर मैनेज सिंडिकेट पर असर पड़ेगा। कुछ हद तक बदलाव दिखा भी, लेकिन जुगाड़ में माहिर सिंडिकेट ने जल्दी ही नया रास्ता निकाल लिया।शतरंज वही है, बस मोहरे बदल दिए गए हैं।
30 जनवरी को खुलना है टेंडर
निविदा दस्तावेजों के अनुसार LED रोप लाइट कार्य की अंतिम तिथि और टेंडर खोलने की तारीख 30 जनवरी 2026 है। इसके बावजूद टेंडर से पहले ही काम शुरू हो जाना वर्क ऑर्डर से पहले कार्य कराए जाने के गंभीर आरोपों को जन्म दे रहा है।
टेंडर को दो हिस्सों में बांटने का खेल
नियमों के मुताबिक ₹10 लाख से अधिक के कार्य ऑनलाइन टेंडर प्रक्रिया के तहत किए जाना अनिवार्य है। लेकिन इस मामले में कार्य को दो भागों में दिखाया गया है ₹9.90 लाख और ₹9.62 लाख ताकि टेंडर नियमों से बचा जा सके।



