बिलासपुर, 17 जनवरी। SECL : ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में साउथ ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (एसईसीएल) में पहली बार ‘चिंतन शिविर’ का आयोजन किया गया। यह शिविर एसईसीएल मुख्यालय, बिलासपुर के ऑडिटोरियम में संपन्न हुआ, जिसमें कंपनी की भावी रणनीति, उपलब्धियों की समीक्षा और भविष्य की चुनौतियों पर गहन मंथन किया गया।
इस चिंतन शिविर का उद्देश्य उत्पादन, डिस्पैच, सेफ्टी, कॉस्ट एफिशिएंसी, सस्टेनेबिलिटी और डिजिटाइजेशन को सुदृढ़ करने के लिए स्पष्ट और समयबद्ध एक्शन प्लान तैयार करना था। कार्यक्रम का नेतृत्व एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन ने किया। उनके साथ निदेशक (तकनीकी–संचालन) एन फ्रैंकलिन जयकुमार, निदेशक (मानव संसाधन) बिरंची दास, निदेशक (वित्त) डी सुनील कुमार, मुख्य सतर्कता अधिकारी हिमांशु जैन तथा निदेशक (तकनीकी) यो./परि. रमेश चंद्र महापात्र उपस्थित रहे।
रिफॉर्म को नारा नहीं, आदत बनाना होगा : सीएमडी
इस अवसर पर सीएमडी हरीश दुहन ने कहा कि एसईसीएल को एक बार फिर देश की नंबर-1 कोल कंपनी बनाना है और इसके लिए रिफॉर्म को केवल नारे तक सीमित न रखकर कार्य-संस्कृति का हिस्सा बनाना होगा। उन्होंने स्पीड, टेक्नोलॉजी और डिजिटल इंटरवेंशन के माध्यम से तेज निष्पादन, पारदर्शी निर्णय प्रक्रिया और बेहतर ग्राहक अनुभव पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि उत्पादन के साथ-साथ गुणवत्ता, कॉस्ट एफिशिएंसी और रेवेन्यू जनरेशन पर भी निरंतर ध्यान देना आवश्यक है। विज़न 2030 और विज़न 2047 को ध्यान में रखते हुए डायवर्सिफिकेशन, नेट-ज़ीरो रोडमैप और इंडस्ट्री लिंकेज में आगे रहने की जरूरत है। सीएमडी ने युवा अधिकारियों को कंपनी का भविष्य बताते हुए उनसे एसईसीएल को फ्यूचर-रेडी संस्था बनाने में अग्रणी भूमिका निभाने का आह्वान किया।
200 अधिकारियों की सहभागिता, 15 विषयों पर मंथन
चिंतन शिविर में मुख्यालय और सभी संचालन क्षेत्रों से लगभग 200 अधिकारी शामिल हुए, जिनमें क्षेत्रीय महाप्रबंधक, विभागाध्यक्ष और ई-5 स्तर तक के युवा अधिकारी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। शिविर के दौरान विभिन्न विभागों द्वारा 15 पीपीटी प्रस्तुतियाँ दी गईं, जिनमें वर्ष 2047 की योजना, अंडरग्राउंड प्रोडक्शन, क्वालिटी कंट्रोल, डिस्पैच, एफएमसी, सेफ्टी, भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापन, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति, डिजिटाइजेशन और एआई का उपयोग, मानव संसाधन, वित्त और कांट्रैक्ट मैनेजमेंट जैसे विषय शामिल रहे।
प्रत्येक सत्र के बाद प्रश्नोत्तर और खुला संवाद आयोजित किया गया, जिसमें सीएमडी, सभी निदेशक और मुख्य सतर्कता अधिकारी ने सक्रिय भागीदारी की। इससे टॉप-डाउन के साथ-साथ बॉटम-अप सुझावों को भी प्रोत्साहन मिला।
नई पहल, नया दृष्टिकोण
गौरतलब है कि कोयला मंत्रालय द्वारा हाल ही में आयोजित राष्ट्रीय चिंतन शिविर में मिले दिशा-निर्देशों के आधार पर एसईसीएल में यह पहल की गई। चिंतन शिविर एसईसीएल की एक नई, संरचित और सहभागी पहल है, जिसका उद्देश्य संगठन में सहयोग, नवाचार, पारदर्शिता और परिणामोन्मुख सोच को मजबूत करना है। यह मंच न केवल भविष्य की चुनौतियों के लिए संगठन को तैयार करने में सहायक सिद्ध हुआ, बल्कि युवा अधिकारियों को नीति-निर्माण और निर्णय प्रक्रिया से जोड़ने का सशक्त माध्यम भी बना।