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कोरबा। आजकल चार की चर्चा पुलिस और नेतागिरी में जमकर हो रही है। वैसे तो चार का गणित सब जगह हिट होता है, लेकिन इस पार्षद चुनाव में वो चार नेताओ का गणित फेल हो गया जो सुड्डो नी साईं को हराने खर्चा कर रहे थे।
चार पैसे के चक्कर में,जवानी चली गई। सब सीख ली चालाकियां,वो नादानी चली गई । ये पंक्तियां वर्तमान पार्षदी चुनाव में सोने से खरा सिद्ध हुआ है।
बात वार्ड चुनाव लड़ रहे एक दिग्गज नेता की है जो सभापति की चाहत में फजीहत कराने उतरे। जब चुनाव में उतर गए तो मैदान छोड़ भाग भी नही सकते। सो नेताजी तन- मन धन से चुनाव जीतने सड़क नाप रहे थे। इसी बीच निर्दलयी और युवा नेता टक्कर देते चना चबवा रहा था। युवा नेता के जोश के पीछे वो चार नेताओं का हाथ था जो किसी भी हाल में चुनाव संचालक बनने वाले भाऊ को हराना चाह रहे थे। कहा तो यह भी जा रहा है कि सभापति का सपना संजोने वाले नेता को हराने ऐसा चक्रव्यूह रचा जा चुका था। जिससे बाहर निकलकर चुनाव जीतना मुमकिन नही नामुमकिन था। हालांकि चेहरे में मुस्कान और विपरीत परिस्थिति में धैर्य न खोने वाले नेताजी ने बाजी पलटते हुए वो कर दिखाया जो किसी वरदान से कम नही है। चुनाव होने के बाद जब चुनावी समीक्षा हुई तो वो चार नेताओं की चर्चा राजनीति के रणनीतिकारों के जुबां पर है जो भाऊ को हराने खर्चा कर रहे थे।